ऋषयः प्रहुरेवं माम त्रितम कूपनिपातितम
प्रिश्निगर्भ त्रितम पहित्येकतद्वितापदितम
ततः स ब्रह्मणः पुत्र आयो ह्युशिवारोस्त्रितः
उत्त्त तारोद्पानाद वे पृश्नी गर्भानु कीर्तनाम”
जब त्रित मुनि अपने भाईयों द्वारा कुए में गिरा दिए गए ……!, उस समय ऋषिगन मुझसे इस प्रकार प्रार्थना की- ‘पृश्नी गर्भ ’ आप एकत और द्वित ( FIRST AND SECOND) के गिराए हुए त्रितको (THIRD) को डूबनेसे बचाईये ….!. उस वक्त मेरा ‘प्रिश्निगर्भ ” नाम बारम्बार कीर्तन करनेसे ब्रह्माजीके आदि पुत्र ऋषिप्रवर ‘त्रित’ उस कुँए से बहार हो गए ….!
‘प्रिश्निगर्भ ’
पृश्नी - भूमि.
गर्भ - अन्दर - UNDERNEATH .GRAINS AND OTHER FOOD SEEDS SPROUTS FROM MOTHER EARTH..!
SO ROTI MADE OF WHEAT FLOUR , RICE ETC ALL ARE ‘PRISHNIGARBHA - ‘KRISHNA’ HIMSELF……!.