August 2011
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“अतः हम HOSPITALITY PROFESSIONALS को चाहिए कि आतिध्य धर्म का पालन करते हुए समस्त...”
– RAMDAS
Aug 7th
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"अतिधि देवो भवः "
अन्नं बहु कुर्वीत I तद वृतं I न कंचन वसतौ प्रत्याचक्षीतI तद वृतं I ************** गृहागत अतिधि के सत्कार केलिए अन्नप्राप्ति हेतु प्रयास करे ….!. वह एक व्रत हैं….!. निवास हेतु पधारे हुए किसी भी अतिधि को प्रतिकूल वचन न बोले, उसे निराश न करे, यह भी एक व्रत हैं…..!. (तैतिरेय उपनिषद् :- ३ -२ - १० ) पीठं दत्वा साधवे अभ्यागताय I आनियाप: परिनिर्निज्य पादौ I सुखं पृष्ट्वा...
Aug 7th
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